शहीद दिवस पर, शहीदों को नमन करते हुए
★ एक छ्न्द ★
जब समिधाओं की हुई है अनिवार्यता तो -
वेदिका - श्रृंगार को न घटते रहे हैं शीश ।
बाल - वृद्ध - बालिकाओं और आर्य - ललनाओं ,
सभी के समय पर डटते रहे हैं शीश ।
शीश झुकने दिया न देश - ध्वज - गौरव का ,
प्रण की प्रतिष्ठा पर कटते रहे हैं शीश ।
शीश रहे चाहे जाए , जाए नहीं स्वाभिमान ,
कटते हुए भी यही रटते रहे हैं शीश ।
★ कमल किशोर भावुक ★
~ # कमल किशोर भावुक का - -
- - रचना - संसार - - से # ~
लखनऊ
7007298155

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