पिता जी याद आतें है . . .
पिता जी याद आतें है . . . ~: गीत :~ #मेरे_भावुक_गीत ◆ दो ◆ ~★~★ पिताजी याद आते हैं - - ★~★~ लुट गया आशीष वाला गाँव भी , छिन गयी वो प्राणदायी छाँव भी , आँख को आँसू पड़े हैं कम । हो गए लो ! बिना छत के हम । काल ऐसी चाल ओछी चल गया देखो । हर तरफ मेरे उदासी मल गया देखो । ठीक से हम तो सम्भलने भी न पाए थे , आपका जाना अचानक खल गया देखो । यों ख़ुशी में घुल गया मातम । हो गए लो ! बिना छत के हम । आपके आँगन - पला दिनमान था मैं तो । आप थे लघुकाय पर बलवान था मैं तो । उम्र काटी आपने बेशक़ अभावों में , आपके रहते मगर धनवान था मैं तो । आज हैं सब ख़्वाहिशें बे - दम । हो गए लो ! बिना छत के हम । दृश्य पावन ...